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आखिर क्यों कमाल नहीं कर पाई मनोज वर्मा की ‘सुकवा’

सबकुछ अच्छा तो कमी क्या रह गई?

सिनेमा 36. मनोज वर्मा निर्देशित फिल्म सुकवा को लेकर ट्रेड में काफी उम्मीदें थीं। फिल्म को काफी पसंद भी किया गया लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को वैसा रिस्पांस नहीं मिल पाया, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी। आखिर क्या वजह रही कि अच्छी फिल्म होने के बावजूद दर्शकों की उम्मीद में खरी नहीं उतर पाई। जिसने भी फिल्म देखी तारीफ करते नहीं थका। मनचाही ओपनिंग न लगने पर मनोज वर्मा कह चुके हैं कि सारी जिम्मेदारी मैं लेता हूँ। लेकिन बड़ा सवाल यह कि ओपनिंग तो हीरो दिलाता है न? यह बात खुद इंडस्ट्री लो कहते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि तीन दिन हीरो चलता है फिर फिल्म।

फिल्म देखने के बाद एक आर्टिस्ट ने कहा था कि एक बार देखने लायक है। बहुत अच्छी होती तो फैमिली लेकर फिर गया होता। मैंने पूछा कौन सी फिल्म है जिसे देखने के बाद आप परिवार लेकर गए। पुष्पा 2, अगले का जवाब था। इसका मतलब यह निकाला जाए कि घर का मुखिया पहले खुद फिल्म देखने आता है और जब फिल्म एक्स्ट्रा आर्डिनरी लगे तो फैमिली को लेके जाता है।

सुकवा को ताबड़तोड़ रिस्पांस न मिलने के क्या कारण होंगे?

– दर्शकों ने मन कुरैशी को किनारे कर दिया?
– दर्शकों को फिल्म का टाइटल समझ नहीं आया?
– दर्शक परेतिन थीम पर फिल्म नहीं देखना चाहते थे?
– फिल्म की रिलीज डेट गलत निकाली गई?
– दर्शकों को हॉरर मूवी के प्रति झुकाव नहीं था?
– दर्शकों ने ट्रेलर देखकर ही थिएटर न जाने का मन बना लिया था?
– फिल्म में एक्स्ट्रा आर्डिनरी करंट नहीं दिखा?

क्या कहते हैं मनोज वर्मा

हमने एक दंतकथा को ग्लैमरस तरीके से सिनेमा के रूप में प्रस्तुत किया। किसी कृति को पसंद करना या नापसंद करना यह अधिकार तो दर्शकों का है। लेकिन एक बात तय है कि जिसने भी फिल्म देखी, उसे पसंद आई। अभी भी हमारी फिल्म चल रही है। बाजारवाद के दौर में बॉक्स ऑफिस को ही सफलता का पैमाना माना जाता है लेकिन अच्छी फिल्म और अच्छा कलेक्शन दोनों में बारीक सा अन्तर है।

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