सादगी और सच्चे प्यार की कहानी ‘मया बिना रहे नई जाए’
मोबाइल से निकल सिल्वर स्क्रीन पर लगाई छलांग

3.5/5
सिनेमा 36. इस साल की चर्चित छत्तीसगढ़ी फिल्मों में से ‘एक मया बिना रहे नई जाए’ साफ सुथरी और सादगी भरी फिल्म है। कई साल से दर्शकों ने करण किरण की जोड़ी को यूट्यूब पर बहुत आशीर्वाद दिया और यही वजह रही कि मेकर्स ने दोनों को फिल्म में लॉन्च कर दिया।
कहानी दो भाइयों की है। बड़े भाई के लिए लड़की देखने छोटा भाई किशन (करण चौहान) भी जाता है और उसकी नजर किरण से टकरा जाती है। बस यहीं से किशन की प्रेम कहानी शुरू होती है। हालांकि किरण की तरफ से किशन के दिल में कुछ भी नहीं रहता।
किशन का दोस्त एक की-पेड फोन जानबूझकर किरण के सामने रख देता है मानो किसी का फोन गिर गया हो। फिर उसी नंबर से करण बनकर कॉल में बोलता है कि मेरा फोन कहीं गिर गया था। आपसे मिलकर ले लूंगा। अब यहां से किशन उसी नंबर पर करण बनकर बातें करता है। बातों का सिलसिला आगे बढ़ता है और किरण भी करण को बिना देखे बिना मिले चाहने लगती है। किशन और करण हैं तो एक ही लेकिन किरण की पसंद तो करण है। ऐसे में किशन कब तक करण बना रहेगा? जब किरण को सच्चाई पता चलेगी तो उसका रिएक्शन क्या होगा? इसका जवाब फिल्म देखने पर ही मिलेगा।
कहानी/डायरेक्शन/ स्क्रीनप्ले
कहानी अच्छी है। आपने साजन देखी होगी जिसमें पूजा यानी माधुरी दीक्षित को सागर नामक शायर से प्यार हो जाता है। बॉडी गॉड में सलमान को करीना से बिना देखे प्रेम हो जाता है। सिर्फ तुम में आरती और दीपक एक दूसरे को चाहने लगते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी को नए अंदाज में लिखा गया है। दीपक कुर्रे का पहला निर्देशन है। उनके इस प्रयास को सराहा जा सकता है। फिल्म का स्क्रीनप्ले अच्छा है। जिससे आप बंधे हुए महसूस करते हैं।
गीत संगीत/ संवाद/ सिनेमेटोग्राफी/ बीजीएम
गीत संगीत अच्छा है। टाइटल सॉन्ग और मया हो गए रे जुबान पर है। संवाद एवरेज हैं। बीजीएम बढ़िया है। इमोशन सीन पर बैकग्राउंड म्यूजिक काफी अच्छा बन पड़ा है।
एक्टिंग
वैसे तो सभी आर्टिस्ट मंझे हुए हैं। लेकिन करण किरण से दर्शकों को जितनी उम्मीद थी वे उसने खरे उतरने की कगार पर पहुंच गए। भूपेश कुमार लिलहरे सॉफ्ट अभिनय में जमे हैं। करण के दोस्तों का अभिनय और खूबसूरत नर्स की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री का काम भी प्रशंसनीय है।
कमियां
फिल्म की सबसे बड़ी कमी लीड हीरो कम उम्र का दिखाई देना। हालांकि करण महज 19 साल के हैं लेकिन पर्दे पर भी 19 साल के ही लग रहे हैं। कहीं न कहीं ये चीज खटकती है। एक फिल्म में पुमंगराज भी कम उम्र के हीरो थे लेकिन उसमें उनका किरदार वैसा ही ढाला गया था। एक्ट्रेस किरण में हीरोइनिज्म अपेक्षाकृत कम है। एक सीन में पिता पुत्र से कहता है कि धान का पैसा बैंक में जमा कर दे। जबकि आजकल सरकार धान का पैसा सीधे खाते में जमा कर रही है। कहीं कहीं टेक्निकल खामियां भी हैं। पोस्टर में डांसिंग पोज है वो फिल्म में नहीं है।