
2.5/5
सिनेमा 36.छत्तीसगढ़ में पलायन यानी कमाने-खाने के लिए बाहर जाने का मामला कोई नया नहीं है। इस थीम पर कुछ और भी छत्तीसगढ़ी फिल्में आईं हैं। ऐसी ही फिल्म है झन जाबे परदेस। फिल्म देखने पर ऐसा लगता है कि यह इंटरवल के बाद शुरू होती है। इंटर तक आप समझ ही नहीं पाते कि स्टोरी क्या है। सबसे खास बात ये है कि लंबे समय से विलन का चेहरा रहे अजय पटेल लीड रोल में हैं। दूसरी बड़ी बात ये है कि हेमलाल कौशल का गंभीर अवतार दिखाई दिया है। इसमें उनकी विविधता नजर आई है।
दाऊ गौंटिया (विक्रम राज) की भांजी आराध्या ( रागिनी) रघु ( अजय पटेल) को चाहती है लेकिन रघु जानकी (ऋतु विश्वकर्मा) से प्यार करता है। भांजी अपने मामा (विक्रम राज) के साथ मिलकर चाल चलती है और बुधराम (हेमलाल कौशल) की फैमिली को दूसरे राज्य स्थित ईंट भट्टी भेज देता है। अब रघु जानकी की तलाश करता है और किसी तरह वहां पहुंच जाता है जहां जानकी की फैमिली मजदूरी कर रही होती है। वे लोग ठेकेदार से प्रताड़ित भी रहते हैं। रघु की जिम्मेदारी होती है कि जानकी के परिवार को सुरक्षित लेकर आए। इसमें कितना सफल होगा रघु ये फिल्म देखकर ही जान पाएंगे। मुद्दे पर आधारित फिल्म बनाना आज की तारीख में किसी रिस्क से कम नहीं। यहां तो मसाला फिल्में दम तोड़ रही हैं, ऐसे में पलायन जैसे मुद्दे पर फिल्म बनाना खतरे का संकेत है।
निर्देशन/संवाद/ गीत संगीत
रतन कुमार निर्देशन की पहली सीढ़ी चढ़ चुके हैं, जिसे एवरेज से थोड़ा अच्छा मान सकते हैं। संवाद ऐसे हैं जो सिनेमाघर के सन्नाटे को चीरते नहीं। गीत संगीत कमाल का तो नहीं लेकिन देखने सुनने में अच्छा लगता है। कर्मा सॉन्ग जबरदस्ती घुसेड़ा गया है। उस सीन में कोई जरूरत तो थी नहीं।
अभिनय
इस फिल्म में प्रोड्यूसर संतोष सम्राट तिवारी ने विलन (लंकेश तिवारी) का रोल किया है। पहले इस रोल के लिए क्रांति दीक्षित से अप्रोच किया गया था लेकिन पैसे को लेकर बात नहीं बनी। इसीलिए प्रोड्यूसर ने खुद ही यह रोल कर लिया। लंकेश तिवारी सब पर भारी साबित हुए लेकिन एक्टिंग में नहीं, खुद का कट आउट लगवाने में। एक्टिंग में भी वे पास हुए हैं लेकिन ग्रेस नंबर के साथ। हेमलाल कौशल मेरिट में रहे। उन्होंने साबित कर दिया कि वे टाइप्ड एक्टर नहीं हैं। अजय पटेल को विलन देख देखकर हम बड़े हुए हैं। इसलिए उनका गुंडापन छूटता ही नहीं। बार बार याद करना पड़ता है कि वे हीरो हैं। लेकिन वे अपने हाव भाव से यकीन दिलाने में पीछे नहीं हटते कि वे विलन हैं। हीरो के अभिनय में उन्हें भी बार्डर पर नंबर मिले और वे पास हो गए। डायरेक्टर रतन कुमार ने एक्ट्रेस ऋतु विश्वकर्मा से अच्छा काम लिया है। आने वाले दिनों में ऋतु को और फिल्में मिलेंगी। राजेश पंड्या को पहली बार वैसा किरदार मिला जिसे वे अच्छे से निभा सकते हैं। उर्वशी ने पगली का रोल किया लेकिन उनकी मौजूदगी कोई खास नहीं लगती।
कमियां
संतोष सम्राट तिवारी रिकॉर्ड बनाना चाहते थे। उनने एक नहीं दो दो रिकॉर्ड बनाए हैं। पहला तो फूल फ्लैश विलन का और दूसरा फिल्म की लंबी लेंथ। सही मायने में फिल्म की असली विलन उसकी लंबाई है।