रिकॉर्ड की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब …?
प्रणव झा का नाम काफी नहीं अगर नतीजे आशाजनक न आएं

सिनेमा 36. प्रणव झा निर्देशित धनेश के आराधना अगर बॉक्स ऑफिस पर गई तो आलोचक यह कहेंगे कि धनेश के चलते चल गई। हालांकि इसे आंशिक तौर पर सत्य भी मान लिया जाए तो ज्यादती नहीं होगी। इसे हम प्रणव और धनेश का डबल इंजन भी कह सकते हैं। वैसे कहा तो यह भी जाता है कि फिल्म का हीरो उसकी कहानी होती है। लेकिन कई बार प्रस्तुतीकरण वैसा नहीं हो पाता जैसा कागज पर लिखा होता है।
आलोचक यह भी कहते हैं कि प्रणव झा की फिल्म में सब कुछ रहता है लेकिन वो कुछ ऐसा कर बैठते हैं कि मामला गड़बड़ा जाता है। यही वजह है कि उनकी कोई भी फिल्म थिएटर में रिकॉर्ड नहीं बना पाई ऐसा आलोचक मानते हैं
हालांकि उन्होंने कोरोना के बाद फिल्म लाकर नया काम तो किया था। नए लोगों को मौका देकर वे कुछ अलग तो कर रहे। सबसे बड़ी बात कि उनके पास लगातार फिल्में रहती हैं। अभी भी उनके पास 5 फिल्में हैं जिन्हें करना न करना उनके हाथ में है।
उन्हें एक सुपरहिट फिल्म की जरूरत है जो उनके नाम को वजन दे। इस साल वे तीन फिल्म निर्देशित करने वाले फिल्मकार तो बन गए लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब तीन में से कम से कम एक तो ब्लॅकबस्टर हो।




