न मया मिली न लॉकडाउन असरदार रहा
दर्शकों ने बनाई लॉकडाउन के मया से दूरी

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सिनेमा 36. इस हफ्ते रिलीज हुई मया के लॉकडाउन पहले ही शो में डाउन हो गई। फिल्म के एक गाना हाय मुस्काना को अच्छा रिस्पांस मिला था, उम्मीद जताई जा रही थी कि एक्ट्रेस को लोग देखने जाएं न जाएं उस गाने को देखने जरूर जाएंगे।
फिल्म आपको उस दौर को याद दिलाती है जिसे आप सपने में भी याद नहीं करना चाहते। कोरोना काल प्रत्येक व्यक्ति के लिए खौफनाक रहा है। कहानी की बात करें तो कीर्ति ( स्नेहा देवांगन) के घर के सामने रहने वाला प्रताप ( नितिन ग्वाला) उसे चाहता है। इधर, कीर्ति को देखने शक्ति ( शिवा साहू) की फैमिली आती है। इस बीच लॉक डाउन की घोषणा हो जाती है। चूंकि कीर्ति प्रताप को दिल दे चुकी है इसलिए शक्ति को मना कर देती है। लॉक डाउन के कारण शक्ति का परिवार कीर्ति के घर पर ही रहता है। इस दौरान कीर्ति का भाई जो लॉक डाउन के चलते जिस ट्रक से लौट रहा होता है उसका एक्सीडेंट हो जाता है। इलाज के लिए आठ लाख की जरूरत है। शक्ति की फैमिली पैसे का इंतजाम कर देती है। भाई का इलाज हो जाता है और वो लौट आता है। इस बीच कीर्ति का दिल शक्ति के लिए धड़क चुका होता है। लेकिन अब कीर्ति होगी किसकी? इसे जानने में थोड़ी भी रुचि हो तो नजदीकी सिनेमाघर पहुंच जाइए क्योंकि गुरुवार को इसका अंतिम दिन हो सकता है। रायपुर के प्रभात में यह फिल्म मात्र छह दिन चलेगी।
एक्टिंग
एक्ट्रेस स्नेहा हीरोइन मैटेरियल नहीं दिखी। नितिन ग्वाला की एक्टिंग ठीकठाक है। रिएक्शन के मामले में मेहनत चाहिए। शिवा का अभिनय सामान्य है। फिल्म में कीर्ति के बहन का किरदार निभाने वाली युवती ने अच्छा काम किया है। क्रांति दीक्षित का किरदार कोई खास छाप नहीं छोड़ पाता। शिवा और स्नेहा की फैमिली के सभी लोगों का अभिनय अच्छा रहा। दादू साहू भी दोस्त के तौर पर अच्छे जमे हैं
निर्देशन/ स्क्रीन प्ले/ म्यूजिक
निर्देशन काफी लचर है। ऐसा लग रहा है मानो किसी तरह फिल्म बना देना इनका उद्देश्य था। स्क्रीन प्ले में ढीलापन है। एडिटिंग ने स्क्रीनप्ले को भी प्रभावित किया है। म्यूजिक एवरेज के आसपास है। हाय मुस्काना ने इज्जत बचा ली।