‘नारायणी सेना’ में प्रणव झा की एंट्री के मायने
एनमाही प्रोडक्शन में चल रहा नया दौर

सिनेमा 36. एनमाही प्रोडक्शन में बीते कुछ दिनों से क्रिएटिव लोगों को जोड़ा जा रहा है। अगर आप महाभारत देखे होंगे तो आपको नारायणी सेना तो याद ही होगी। खैर हम उसमें ज्यादा आगे नहीं जाना चाहते क्योंकि कोई हमसे यह भी पूछ सकता है कि दुर्योधन कौन है? हमने सिर्फ उदाहरण के तौर पर यह लिखा है। तो सीधे से मुद्दे पर आएं तो पाएंगे कि एनमाही एक तरह से नारायणी सेना तैयार कर रहा है।
सबसे पहले मनीष मानिकपुरी की एंट्री हुई जो ट्रेड के लिए ज्यादा तो नहीं लेकिन थोड़ी हैरत वाली खबर थी। क्योंकि गुईयां के दौरान दोनों के बीच कुछ तो हुआ था। इसके बाद गंगा सागर पड़ा का नाम आया लेकिन उनका इन माही ज्वाइन करना कोई आश्चर्य की बात नहीं थी।
ट्रेड के साथ साथ पब्लिक के लिए जो आश्चर्य वाली घटना थी, वह थी प्रणव झा का एन माही में शामिल होना। वैसे तो हर किसी को अपने हिसाब से फैसले लेने का अधिकार है और लेना भी चाहिए। लेकिन चूंकि टीना टप्पर और डोली लेके आजा में जिस तरह मोहित साहू ने बयानबाजी की थी, इससे लग रहा था कि अब प्रणव और मोहित न मिल पाने वाले दो किनारे हो गए हैं।
वैसे दोनों के बीच किसी फिल्म की रिकवरी को लेकर खटास थी जो उस वक्त और बढ़ गई जब प्रणव ने मया दे दे मया लेले 2 को डायरेक्ट करने से सिर्फ इसलिए इनकार कर दिया था जब उन्हें पता चला कि प्रोड्यूसर टीम में मोहित साहू भी हैं। इस घटना से तरुण सोनी से भी उनकी दूरी बढ़ी। फिर टीना टप्पर वर्सेस डोली लेके आजा में मोहित प्रणव के खिलाफ खुलकर आ गए।
ऐसे में दोनों के बीच न मिटने वाली दूरियां तय हो गई थीं। हालांकि प्रणव ने किसी ओपन प्लेटफॉर्म मोहित साहू के लिए कभी कोई गलत बयानबाजी नहीं की। अब वक्त का पहिया देखिए कैसा घूमा कि दोनों की साथ वाली तस्वीरें आ गईं। अब यह तस्वीर आगे चलकर किसी न किसी प्रोजेक्ट में रोशनी देगी, यह बात भी अब आईने की तरह साफ है। प्रणव झा का एन माही में जाने के क्या मायने हो सकते हैं। यही कि
कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर, ना काहू से दोस्ती, न काहू से बैर