पहले पैसा दे देते तो इतनी छीछालेदर नहीं होती
बबा को मिला मेहनताना लेकिन लेट से

सिनेमा 36. हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी…यह फिल्मी गीत आज छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री की एक ताजा घटना पर सटीक बैठता नजर आता है। मामला फिल्म ‘धनेश के आराधना’ में ‘बबा’ का किरदार निभाने वाले कलाकार से जुड़ा है, जिनसे काम तो लिया गया लेकिन समय पर मानदेय नहीं दिया गया।
दरअसल, बबा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अभिनेता धनेश साहू और राज वर्मा को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। हालांकि इंडस्ट्री में राज वर्मा की छवि लेन-देन और व्यवहार दोनों में साफ-सुथरी मानी जाती है, लेकिन वीडियो देखने वाले आम दर्शकों को इस पृष्ठभूमि की जानकारी नहीं थी। ऐसे में दोनों कलाकारों पर सवाल उठना स्वाभाविक था।
मामले ने तूल पकड़ा तो धनेश साहू ने बबा को 10 हजार रुपए और राज वर्मा ने 5 हजार रुपए देकर मानदेय का भुगतान किया। शुरुआती जिम्मेदारी धनेश की मानी जा रही है, क्योंकि बबा को काम पर वही लेकर आए थे। धनेश की टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे बबा ने तो नाराज होकर थाने जाने तक की बात कह दी थी। हालांकि उनके पास कोई लिखित एग्रीमेंट नहीं था, इसलिए कानूनी कार्रवाई की स्थिति भी स्पष्ट नहीं थी—जबकि अक्सर एग्रीमेंट होने पर भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई नहीं हो पाती।
अब बबा ने साफ कहा है कि उन्हें उनका पैसा मिल गया है और वे आगे कुछ नहीं कहना चाहते। फिर भी यह घटना पूरी इंडस्ट्री के लिए सबक है। कैरेक्टर आर्टिस्ट अक्सर दिहाड़ी मजदूरों की तरह काम करते हैं। ऐसे में उनका मेहनताना समय पर मिलना न केवल पेशेवर जिम्मेदारी है, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता का भी प्रश्न है।




