यहां फिल्म चलती है कंट्रोवर्सी नहीं
कितना रंग लाएगा कारण किरण का मुद्दा

सिनेमा 36. गर्मी के साथ ही छत्तीसगढ़ में फिल्मी पारा भी बढ़ने लगा है। वजह है करण किरण की फिल्म मया बिना रहे नई जाए। इस फिल्म के साथ कंट्रोवर्सी जुड़ चुकी है। वैसे तो कंट्रोवर्सी यानी विवादित होना कई बार फायदेमंद होता है लेकिन क्या छत्तीसगढ़ी सिनेमा में कभी इसका लाभ मिला। जवाब है नहीं।
अगर हम हाल में आई फिल्म डोली लेके आजा की बात करें तो फिल्म के टोटल कलेक्शन लगभग 50 लाख रहे। 25 लाख रुपए प्रोड्यूसर शेयर बने। इतना तो उन्होंने पब्लिसिटी में खर्च कर दिया था। वैसे इस फिल्म को विवाद का फायदा मिलता नजर आया है। पोस्टर विवाद और जातिगत रंग के चलते फिल्म ने इतना कलेक्शन ले आया। बावजूद लागत से दूर रही।
काफी पहले दो फिल्में मोर डौकी के बिहाव और रौताइन पर विवाद गहराया था। इनका नाम आगे चलकर ऑटो वाले भाटो और सपनों में सपना के नाम से रिलीज की गई। दोनों फिल्में लागत से दूर रहीं।
एक और कंट्रोवर्सी सतीश जैन निर्देशित फिल्म ले शुरू होगे मया के कहानी पर भी हुई थी। इसमें स्कूली छात्रा को प्रेग्नेंसी में स्कूल जाते दिखाया गया था। हालांकि बाद में सीन को सेंसर से ही कटवा दिया है। लेकिन इस फिल्म में भी कंट्रोवर्सी का कोई फायदा नहीं मिला। क्योंकि फिल्म रिलीज से पहले तक तो किसी को पता ही नहीं था।
जानकार कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में कंट्रोवर्सी के चलते फिल्में जरूर चर्चे में आ जाती हैं लेकिन अंततः फिल्म का कंटेंट ही चलता है। देखने वाली बात होगी कि भाई बहन की जोड़ी करण किरण अभिनीत फिल्म को कंट्रोवर्सी का कितना फायदा मिलता है। क्यूंकि इस बार का विवाद सबसे हटकर है।
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