‘मया बिना रहे नई जाए’ से पहले भी विवाद में आई थीं छत्तीसगढ़ी फिल्में
तूल पकड़ रहा है भाई बहन को हीरो हीरोइन बनाए जाने का मामला

सिनेमा 36. इन दिनों छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘मया बिना रहे नई जाए’ खूब चर्चे में है। इसकी वजह है रील में हीरो हीरोइन और रियल में भाई बहन की जोड़ी। दरअसल, करण किरण की पहचान एल्बम की दुनिया में प्रसिद्धि हासिल कर चुकी थी जिसे एवीएम वालों ने स्क्रीन पर भुनाने के लिए फिल्म बना दी। फिल्म से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर आते ही विरोध की आग उठने लगी और यही आग लपट बनकर संगठनों तक पहुंची। संगठन ने इसे सनातनी परंपरा और नैतिकता का हवाला देते हुए फिल्म पर रोक लगाने की मांग कर दी।
शिकायत का पहला मामला राजनांदगांव से आया जहां विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने प्रशासन को शिकायती पत्र सौंपा। इसमें कहा गया कि फिल्म में भाई बहन को हीरो हीरोइन दिखाया जाना अशोभनीय है। सीजी फिल्म इंडस्ट्री के लोग इस फिल्म का पक्ष ले रहे हैं लेकिन निर्देशक प्रणव झा ने सार्वजनिक तौर पर आपत्ति जताई है। सीजी लिव नामक यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक इंटरव्यू में प्रणव झा ने लिखा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। भाई बहन के संस्कारित रिश्तों की परिभाषा गलत रूप ले सकती है।
इन फिल्मों पर विवाद
1. मोर डौकी के बिहाव
क्षमा निधि मिश्रा ने ‘मोर डौकी के बिहाव’ बनाई थी। कुछ संगठनों ने फिल्म के टाइटल पर आपत्ति की। उनका कहना था कि कोई अपनी पत्नी की शादी कैसे करा सकता है। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में फिल्म रिलीज हुई। आपत्ति को देखते हुए फिल्म का नाम बदला गया। यह फिल्म आगे चलकर ‘ऑटो वाले भाटो’ के नाम से रिलीज की गई।
2. रौताइन
अमित प्रधान ने साल 2013 में ‘रौताइन’ फिल्म बनाई थी। जांजगीर और रायगढ़ समेत कुछ इलाकों में यादव समाज ने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यह जाति सूचक टाइटल है। जनदर्शन में ज्ञापन सौंपा गया और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। जनभावना का ध्यान रखते हुए फिल्म का नाम ‘सपनों में सपना’ रखा गया।