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करण किरण के पक्ष में आया सीसीटीपीए

चेयरमैन संतोष जैन बोले, निजी जीवन और पर्दे किए गए अभिनय को अलग दृष्टिकोण से परखा जाए

सिनेमा 36. इस शुक्रवार यानी 4 अप्रैल को रिलीज होने वाली छत्तीसगढ़ी फिल्म मया बिना रहे नई जाए विवादों से घिर चुकी है। भाई बहन की जोड़ी करण किरण इस फिल्म में हीरो हीरोइन की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया में फुल कंट्रोवर्सी चल रही है। सीजी फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी अपनी राय रख रहे हैं। निर्देशक प्रणव झा ने इसे गलत करार दिया है। वहीं अब छत्तीसगढ़ सिने एंड टेलीविजन प्रोड्यूसर एसोसिएशन (सीसीटीपीए) के चेयरमैन ने अपनी राय रखी है। सिनेमा 36 को भेजे वॉट्सऐप मैसेज में जैन ने लिखा-

सगे भाई-बहन की फिल्म में हीरो-हीरोइन को लेकर इन दिनों कुछ शंकाएं पढ़ने में आ रही हैं। फिल्म में जो कुछ किया जाता है,उसकी तुलना वास्तविक जीवन के रिश्तों से जोड़ना सही नहीं है। मदर इंडिया में सुनील दत्त की मां का रोल करने वाली नर्गिस दत्त वास्तविक जीवन में पति-पत्नी बने और भी कई उदाहरण हैं। अभिनय पर काया प्रवेश के कारण इसे पंचम वेद माना गया है। एक साधारण रिक्शा चालक पर्दे पर राजा की तरह भूमिका में दिखता है। वह उस पल रिक्शा चालक नहीं होता। सफल कलाकार वही है,जो दी गई भूमिका को जी सके। हम अक्सर पर्दे में किए गए पात्र को अपने नजरिए से देखने के आदि हैं। जिसे निजी जीवन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। पर्दे पर राम या रावण बने व्यक्ति निजी जीवन में क्या हैं ये उनका निजी मामला है। हमें तो बस पर्दे वाली छवि तक ही अपने को सीमित रखना चाहिए,यही उचित है। निजी जीवन में प्राण बहुत अच्छे इंसान के रूप में जाने जाते थे पर पर्दे में बहुत बुरे इंसान के रूप में जाने जाते थे। इसलिए निजी जीवन और पर्दे या मंच पर किए गए अभिनय को अलग अलग दृष्टिकोण से ही परखा जाना चाहिए।

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