सिंपल लव स्टोरी में सस्पेंस का तड़का
किशन सेन स्टारर डोली ले के आजा, मोर दूल्हा राजा

सिनेमा 36. इस हफ्ते किशन सेन स्टारर “डोली लेके आजा मोर दूल्हा राजा” रिलीज हुई। इस फिल्म का प्रचार जिस अंदाज में किया गया, उस हिसाब से ओपनिंग तो नहीं लगी लेकिन फिल्म एंटरटेन करेगी। “जीना है तो पीना है… ” यह गीत काफी पॉपुलर हुआ था, सिनेमाघर में देखना बहुत अच्छा लगता है। अब ये समझ नहीं आया कि कमाल म्यूजिक का है या प्रभात में लगे चार बूफर का।
फटाफट कहानी पर बात करें तो फिल्म की शुरुआत एक टिपिकल छत्तीसगढ़ी गीत तोर बर आषाढ़ सावन से होती है। जो दिल को छूने वाला गीत है। आर मास्टर और अंजलि की शादी होती है, लेकिन कुछ समय बाद उनके घर में आग लगा दी जाती है और दोनों का चैप्टर क्लोज हो जाता है। कहानी दस साल आगे बढ़ती है। परदे पर किशन( किशन सेन) और मंजू ( मंजिमा) की लव स्टोरी शुरू हो जाती है।
बीच बीच में एक साया नजर आता है लेकिन समझ नहीं आता कि मामला क्या है। फिल्म में मुखिया नामक किरदार को हंडा का सपना आता है। यहीं से हंडा खोजने की शुरुआत हो जाती है जिसे कुछ लोग तलाशने निकल जाते हैं लेकिन उन्हें असफलता मिलती है। मंजू की शादी शराब माफिया का किरदार निभा रहे पुष्पेंद्र सिंह के बेटे से तय हो जाती है, इधर किशन खुद को मिट्टी तेल से जलाकर आत्महत्या करना चाहता है। तभी एक साया उसे बचा लेता है। आखिर वो साया कौन है? किशन मंजू मिल पाएंगे इसके उत्तर फिल्म में मिलेंगे। हांडा का क्या राज है? इसका जवाब पार्ट 2 में पता चलेगा। किशन के चाहने वालों के लिए सरप्राइज पैकेज दबा बल्लू सॉन्ग रखा गया है।
अभिनय
किशन का काम अच्छा है। मंजिमा स्कूल यूनिफार्म पर ज्यादा अच्छी दिखी हैं। सलीम अंसारी का अभिनय जोरदार है। मुखिया का किरदार निभाने वाले ने अच्छी एक्टिंग की है। किशोर मंडल तांत्रिक में जमे हैं।