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प्रेम और समर्पण का मिश्रण ‘कईसे बंधना म बांधे रे’

अभिनय में एक कदम आगे बढ़ीं आर्वी सिन्हा

रेटिंग 3/5

सिनेमा 36. पिछले हफ्ते छत्तीसगढ़ी फिल्म कईसे बंधना म बांधे रे… रिलीज हुई और हफ्तेभर में सिनेमाघरों से उतर भी गई। 26 वर्षीय डायरेक्टर कौशल पटेल ने डेब्यू किया है। वैसे तो दो हीरोइन और एक हीरो वाली कई फिल्में आईं हैं, इस लिहाज से कहानी कोई नई नहीं है। हां ये जरूर है कि इसे नए तरीके से पेश किया गया है। शिवम (जागेश वर्मा) बड़े घर का बेटा है जो आगे चलकर डॉक्टर बनता है। उसे सब्जी बेचने वाली ममता (आर्वी सिन्हा) से प्यार हो जाता है। ममता के पिता शराबी हैं। एक हादसे में ममता की मौत हो जाती है। ममता की याद में शिवम शराबी हो जाता है। तभी उसकी जिंदगी में चित्रा (पूनम गोस्वामी) की एंट्री होती है। न चाहते हुए भी मां-बाप के कहने पर शिवम की शादी चित्रा से हो जाती है। फिल्म आगे बढ़ती है और एक मोड़ ऐसा आता है जब शिवम का सामना एक पागलखाने में ममता के साथ होता है। वह उसे लेकर घर आता है। उसकी इस हालत का जिम्मेदार कौन है? अब गर्भवती चित्रा का क्या होगा? इसके जवाब फिल्म देखने पर ही मिलेंगे। इसके लिए आपको यूट्यूब पर फिल्म आने का इंतजार करना होगा। कुलमिलाकर कईसे बंधना म बांधे रे अपने टाइटल को जस्टिफाई करती है। यह प्रेम और समर्पण की संयुक्त कहानी है।

कहानी, निर्देशन, संवाद

फिल्म की कहानी अच्छी है। फर्स्ट हाफ का निर्देशन ठीकठाक है लेकिन सेकंड हाफ में फिल्स अच्छे से कसी लगती है। क्लाइमेक्स में आप भावुक हो सकते हैं। संवाद सामान्य हैं, जो आपको बोझिल भी नहीं लगते।

गीत-संगीत, बीजीएम, सिनेमैटोग्राफी

गाने एवरेज हैं, बोरिंग नहीं लगते। बीजीएम अच्छा है, सिचुएशन से मेल खाता है। सिनेमैटोग्राफी एवरेज से थोड़ी अच्छी मान सकते हैं। टेक्निकली फिल्म ठीक बनी है।

अभिनय

टीना टप्पर के दो सीन में ही ध्यान खींचने वाली पूनम गोस्वामी ने इसमें लीड रोल किया है। उनका अभिनय नपातुला है। अगर किसी ने चौंकाया है तो वह लीड रोल कर रही आर्वी (जागृति) सिन्हा ने। पागल का रोल कर उसने अपने अभिनय का लोहा मनवा दिया है। अभी तक उन्होंने जितनी भी फिल्में की वह एक तरफ और यह फिल्म दूसरी तरफ। पलड़ा इसी का भारी होगा। जागेश वर्मा की मेहनत भी रंग लाई है लेकिन उन्हें और मेहनत चाहिए। दिव्या नागदेवे, रूद्रा राजपूत, मोहित जोशी, आनंद साहू और लोरंस का काम भी अच्छा है।

कमियां

फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी है। गानों में बॉलीवुड की धुन है। कहीं-कहीं स्क्रीनप्ले में ढीलापन है। फिल्म देखते देखते दर्शकों को सरप्राइज़ वाला झटका भी लग सकता है। हालांकि दर्शकों को झटका लगे उससे पहले ही फिल्म उतर गई और उल्टे मेकर्स को ही झटका लग गया।

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