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पंचायती राज की किताब घोलकर पी तब उतार पाया पर्दे पर

27 साल के सनी सिन्हा ने किया है दस्तावेज का निर्देशन

सिनेमा 36. अगले हफ्ते नई तरह की फिल्म आ रही है दस्तावेज। यह फिल्म छत्तीसगढ़ी सिनेमा के इतिहास में सबसे हटके है। इसके बहुत से कारण हो सकते हैं। पहला यह कि इसके निर्देशक की उम्र 27 साल है। इतना ही नहीं पूरी यूनिट अंडर 30 है। दूसरा, निर्देशक सनी सिन्हा ( फोटो में टोपी पहने हुए) ने जबसे होश संभाला उनका रुझान फिल्मों की तरफ ही रहा। उन्होंने अगर कोई पहली सीजी फिल्म देखी तो वो थी भूलन द मेज। इससे उनके टेस्ट का पता चलता है।

किताबें पढ़ी, हर चीज को बारीकी से समझा

जब पूरा रायपुर गरबे की धूम में आनंदित था तब सनी सिन्हा हमसे बातचीत कर रहे थे। अनऑफिशियल बातचीत में कई ऐसी बातें निकलकर आईं जिससे लगा कि बंदे ने उम्र से ज्यादा स्ट्रगल देखा है। प्रोफेशनल ही नहीं, पर्सनल भी। उन तमाम प्रसंगों पर भी बात होगी लेकिन उससे पहले यह जान लें कि फिल्म से पहले सनी ने पंचायती राज से जुड़ी कई किताबें पढ़ डालीं। कुछ पीएससी की किताबें भी पढ़ीं। उससे इनको अंदाजा है कि इसे पर्दे पर कैसे दिखा सकते हैं।

स्क्रैच बनाया, ताकि याद रहे शॉट कैसा लगेगा

सनी ने हर सीन के स्क्रैच बनाए हैं। इस तरह की रणनीति बहुत कम देखने में आती है। नालंदा परिसर में अपने दोस्त और फिल्म के एसोसिएट डायरेक्टर/ कोरियोग्राफर सुमित बसईवाला के साथ टिशु पेपर में स्क्रिप्ट/ सीन लिखा करते थे।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में था इंट्रेस्ट

सनी को मैकनिकल इंजीनियरिंग करनी थी। उन्हें एनआईटी वारंगल मिला, लेकिन मैकेनिकल नहीं बल्कि बायो टेक्नोलॉजी। मनचाही ब्रांच नहीं मिलने से सनी ने रायपुर के शंकराचार्य कॉलेज में एडमिशन ले लिया। तीन साल की पढ़ाई के बाद ड्रॉप ले लिया क्योंकि इन्हें लाखों के एड प्रोजेक्ट करने में इंट्रेस्ट आने लगा। वैसे तो इनके पास रील के जमाने से कैमरे के कलेक्शन रहे हैं लेकिन एड शूट के दौरान महंगे से महंगे कैमरे भी चलाए। यहीं से उनका रुख सिल्वर स्क्रीन की ओर मुड़ा और कॉन्सेप्ट साफ था कि डायरेक्शन ही करना है।

टूबी कंटिन्यू….

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